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चुनाव में एक मत की कीमत समझ गये माननीय मंत्री जी : 1999 में अटल बिहारी की सरकार गिरी थी एक मत से पहले भी दो नेता हारे हैं एक वोट से, एक तो CM ही बनते...।

Deekay Thakur

Tue, May 5, 2026

भारतीय राजनीति में एक वोट से‌ हार-जीत के किस्से : तमिलनाडु में थलापति विजय की टीवीके के सीनिवासा सेतुपति ने एमके स्टालिन के मंत्री पेरियकरुप्पन को तिरुपत्तूर सीट पर मात्र एक वोट से हरा दिया भारत को एक मत से हार-जीत की कीमत को समझने वाला एक और नेता मिल गया है। तमिलनाडु में एमके स्टालिन की सरकार के कद्दावर मंत्री और लगातार चार बार के विधायक पेरियकरुप्पन 1 वोट के अंतर से एमएलए का चुनाव हारने वाले देश के तीसरे नेता बन गए हैं। तमिलनाडु की तिरुपत्तूर सीट पर फिल्मों के स्टार चंद्रशेखरन जोसेफ विजय उर्फ थलापति विजय की तमिलगा वेत्त्री कझगम (टीवीके) के कैंडिडेट सीनिवासा सेतुपति ने पेरियकरुप्पन को मात्र 1 वोट के मार्जिन से हराकर पहली बार में विधानसभा में सीट पक्की कर ली है। सेतुपति पहले राउंड से 25वें चक्र राउंड तक पीछे चल रहे थे, लेकिन 26वें चक्र के बाद 199 से आगे हो गए। इसके बाद 30वें और आखिरी राउंड की गिनती तक वो लीड बढ़ने-घटने के बाद अंत में 1 वोट से जीत पर सेटल हो गए। भारत में पेरियकरुप्पन से पहले दो नेता विधानसभा के चुनाव में 1 वोट के अंतर से हारे हैं। एक जीत गया होता तो अपने राज्य का मुख्यमंत्री ही बनता। चुनावी इतिहास की जितनी जानकारी मौजूद है, उसके मुताबिक इस तरह 1 वोट से पहली हार कर्नाटक में 2004 के विधानसभा चुनाव में हुई। तब कांग्रेस के रंगास्वामी ध्रुवनारायण ने जनता दल- सेकुलर के विधायक एआर कृष्णमूर्ति को 1 वोट से हराया था। कृष्णमूर्ति इसी सीट से 1994 और 1999 में जनता दल के टिकट पर जीते थे। आजकल वो कांग्रेस में हैं और इस समय कोल्लेगल सीट से एमएलए हैं। कृष्णमूर्ति ने 2004 के चुनाव में समय बचाने के लिए अपने ड्राइवर को वोट देने से रोक दिया था, जो बहुत महंगी पड़ी।

एक वोट से अब तक तीन नेता हारे हैं, लेकिन सीपी जोशी विधायिकी के साथ-साथ मुख्यमंत्री बनने का मौका गंवाने वाले इकलौते नेता हैं। राजस्थान कांग्रेस के बड़े नेता और गांधी परिवार के नजदीकी सीपी जोशी 2008 में अपनी पुरानी सीट नाथद्वारा से लगातार तीसरी जीत के लिए लड़ रहे थे, लेकिन भाजपा के कल्याण सिंह चौहान ने 1 वोट से पटक दिया। सीपी जोशी की हार से राजस्थान में पहले एक बार सीएम रह चुके अशोक गहलोत का रास्ता साफ हो गया और वो दोबारा मुख्यमंत्री बन गए। सीपी जोशी की पत्नी, मां और ड्राइवर ने चुनाव में वोट नहीं डाला था, जिसकी कीमत उनके अलावा कोई और नहीं समझ सकता। सीएम बनने से चूके सीपी जोशी 2009 में भीलवाड़ा से लोकसभा का चुनाव जीतकर दिल्ली गए और तब मनमोहन सिंह सरकार में महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री बने।

एक वोट से 1999 में गिर गई थी अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार

एक वोट से विधायक का चुनाव हारने और जीतने के तीन उदाहरण अब हो गए हैं। भारत में एक मत से सरकार गिरने की भी नजीर है। 1999 में जयललिता के समर्थन वापस लेने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। वाजपेयी ने लोकसभा में विश्वास मत का प्रस्ताव रखा था, लेकिन उसके समर्थन में 269 वोट पड़े और विरोध में 270। वाजपेयी का लोकसभा में दिया गया वो भाषण आज भी लोग सुनते और याद करते हैं। सरकार गिरने के बाद चुनाव हुए और वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए की मजबूत सरकार बनी, जिसे हराकर 2004 में कांग्रेस ने सरकार में वापसी की।

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