शिक्षा विभाग के खटराल अफसर का @जीरों टॉलरेंस वाला सुशासन रथ @ पहुँचा : विधायक के गृहग्राम के स्कूल तक ~ मामला RTI आवेदनों पर मनमानी रकम वसूली का ~~~
फिंगेश्वर /गरियाबंद (छत्तीसगढ़ )।अपनी कार्यशैली को लेकर विगत आठ - दस महिनों से सुर्खियों में रहने वाला जिला का विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय फिंगेश्वर में पदस्थ बीईओ एक बार फिर चर्चा का सबब बने हुए है,ताजा तरीन मामला क्षेत्रीय विधायक के गृहग्राम स्थित स्कूल से जुड़ा हुआ है जहां बीईओ के मौखिक आदेश पर शासकीय प्राथमिक शाला पीपरछेड़ी के प्रभारी प्रधान द्वारा आरटीआई आवेदनों पर सूचना लागत मूल्य निर्धारित दर से अधिक वसूली की शिकायत के साथ ही मामले का अहम पहलू कलेक्टर के आदेश पर गरियाबंद डीईओ द्वारा 20/07/2026 को जारी जांच आदेश क्र/3840/जि.शि.अ./स्था.03/जनदर्शन /2025/26 को प्रति मंगलवार कलेक्ट्रेट में समय सीमा की बैठक में उपस्थिति दे महज औपचारिकता पूरी करने वाले बीईओ द्वारा लगभग ढ़ाई महिने तक दबाएं रख जनमानस में जिला प्रशासन की छबि धूमिल करने का है।यह पहला मौका नही है जब इस खटराल अफसर की चर्चा हो रही है पिछले कुछ महिनों पूर्व ये फोन पे, के माध्यम से अवैधानिक वसूली, पेंशन प्रकरण, प्रभार वापस ले तत्कालीन डीईओ द्वारा उच्च कार्यालय को कार्रवाई हेतु प्रस्ताव भेजे जाने को लेकर महिनों तक मिडिया में छायें रहे।लेकिन विगत् तीन वर्षों से चल रहे जीरो टॉलरेंस और सुशासन के दौर में जिले की उलटी बहती गंगा में ऐसी डुबकी लगाई कि कार्रवाई तो दूर की बात दस दिनों बाद ही फिर से बीईओ का प्रभार लेकर निकले।

शिक्षा विभाग फिंगेश्वर में अब नई परंपरा सूपा के साथ चलनी भी चलन में~~~~
जिले शिक्षा महकमें में आर्थिक अनियमितताओं,अवैधानिक लेन -देन को लेकर अब तक सिर्फ बड़े अधिकारियों की ही कारगुजारियां सुर्खियों में होती थी लेकिन संबंधित मामलों पर समुचित कार्रवाई न होने के कारण यह बीमारी देखा - सीखी अब यह संकुलो के साथ अधीनस्थ स्कूलों तक पहुंचने लगा है, कुछ ऐसा ही मामला पीपरछेड़ी स्कूल में सामने आया है । मिली जानकारी के अनुसार आवेदक ने स्कूल से संबंधित दस्तावेजों की प्राप्ति के लिए आरटीआई की धारा 6(1) का आवेदन जनसूचना अधिकारी /प्रभारी प्रधानपाठक को प्रस्तुत किया, वांछित दस्तावेज तैयार कर 23/06/2026 को उन्होंने मोबाइल पर आवेदक को फोन पे में पच्चास रुपये का भुगतान कर मांगी गई जानकारी ले जाने कहा भुगतान करने के कुछ घंटो बाद आवेदक जब दस्तावेज लेने स्कूल पहुंचा तो उन्हें चार पृष्ठों वाली जानकारी प्रदान की जिनका अधिनियम के तहत् निर्धारित मूल्य मात्र आठ रुपये होता था लेकिन प्रभारी प्रधानपाठक ने फोन पे के माध्यम से प्रति पेज बारह रुपये पच्चास पैसे के हिसाब से ट्रांजैक्शन करवा लिए थे जिस पर आवेदक ने आपत्ति की तो उन्होंने कहा कि बीईओ साहब का आदेश है, दो रुपये के हिसाब से जानकारी दोगें तो आवेदनों का ढ़ेर लग जायेगा, तत्संबंधी आदेश की प्रति मांगे जाने पर कहा गया कि आदेश मौखिक है।आवेदक को नियम के प्रावधानों के प्रावधानों के प्रतिकूल ली गई अतिरिक्त राशि वापस नही की गई ।आवेदक बहस न कर जानकारी ले वापस आ इसकी चर्चा अधिनियम के जानकारों से कर जब 25 जून को दी गई जानकारी के एवज में किऐ गये भुगतान की रसीद मांगी तो संबंधित प्रधानपाठक ने बात बिगड़ते देख तत्काल 30 ₹ फोन पे के माध्यम से वापस कर प्रति पेज 5 ₹ की दर से कुल 20 ₹ की रसीद बना कर दी।
मामले की शिकायत कलेक्टर जनदर्शन में करने के साथ आरटीआई आवेदन भी
प्रभारी प्रधानपाठक के रवैये से खफा आवेदक ने इसकी शिकायत 30/06/2026 को जनदर्शन आवेदन के माध्यम से कलेक्टर गरियाबंद को कर मामले की जांच कर दोषी कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की, जहाँ से शीघ्र जांच कर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बावजूद बीस दिनों तक आवेदन ठंडे बस्ते में पडा़ रहा जनदर्शन पोर्टल में आवेदन की पेंडेंसी देख आवेदक ने प्रकरण से संबंधित जांच प्रतिवेदन की सत्यापित प्रतिलिपियों प्राप्ति के लिए 14/07/2026 को आरटीआई के तहत् धारा 6(1) का आवेदन लगा दिया, इसकी भनक लगते ही कार्या.डीईओ गरियाबंद द्वारा आनन-फानन में 20/07/2026 को बीईओ फिंगेश्वर को पत्र क्र./3840/जि.शि.अ./स्था.03/जनदर्शन/2026-27 जारी कर आवेदन पर तीन दिनों के भीतर अनिवार्य रुप से जांच प्रतिवेदन भेजने के लिए आदेशित किया गया ।

कलेक्टर सख्ती पर डीईओ का जारी आदेश ढ़ाई महिने तक लटका रहा बीईओ चेंबर के की-रिंग की खूंटी पर ~~~
कलेक्टर की सख्ती पर डीईओ द्वारा जांच के लिए आदेश क्र./3840/जि.शि.अ./ 20/07/2026 की फिंगेश्वर कार्यालय में लंबे अरसे से जमे क्षेत्र की सियासी नब्ज्बाजी में माहिर खटराल बीईओ के सामने भला क्या बिसात,महिनों के लिए आदेश को लटका दी अपने चेंबर के की-रिंग की खूंटी पर। इस बीच आवेदक ने 25/08/2026 को मामले पर तैयार जांच प्रतिवेदन की प्राप्ति आरटीआई एक्ट के तहत् धारा 6(1) का आवेदन लगा दिया लेकिन नतीजा सिफर ही रहा, न तो मामले पर विभागीय स्तर पर कोई जांच हुई,और न ही आरटीआई आवेदन पर कोई जानकारी दी गई।खटराल अफसररों की सियासी मगरुरियत तब टूटी जब आवेदक ने पहले के आवेदन को बीईओ द्वारा जांच न कर आदेश को दबाएं जाने की शिकायत 06/10/2026 के कलेक्टर जनदर्शन में कर झटका दिया तब कही जाकर डीईओ द्वारा पूर्ववर्ती आदेश का समय सीमा के भीतर पालन नही करने वाले फिंगेश्वर बीईओ को अनुशासन हीनता के लिए बिना कोई कारण बताओ नोटिस जारी किये मामले पर जांच के लिए एक नया आदेश क्र./5085/जि.शि.अ./सतर्कता /जनदर्शन /2026-27 गरियाबंद दिनांक 12/10/2026 जारी किया। तो वही दूसरी ओर आवेदक ने पीआईओ - डीईओ गरियाबंद के विरुद्ध लंबित धारा 6(1) के आवेदन पर एफएओ -जेडी रायपुर में अपीलीय आवेदन ठोंक दी।
जांच का जिम्मा @फोन पे कांड@ मे चर्चित संकुल केंद्र बेलटुकरी के प्राचार्य को~~~
संबंधित मामले पर अप्रैल 2026 में पॉंचवीं एवं आठवीं की केन्द्रीकृत बोर्ड परीक्षा के फर्द निर्माण के लिए विभाग के संकुल स्तरीय आधिकारिक व्हाट्सअप ग्रुप में फोन पे के माध्यम से स्कूलों से अवैध वसूली के लिए चर्चा के साथ विवादों में रहे संकुल केंद्र बेलटुकरी के प्राचार्य को जांच अधिकारी नियुक्त कर उभय पक्ष की उपस्थिति में जांच प्रक्रिया दिनांक 16/10/2026 को संपादित की गई है। गौरतलब है कि फोन पे कांड में संकुल स्तर जिम्मेदार लोगों के साथ बीईओ - तात्कालीन डीईओ एवं रुलिंग पार्टी के एक प्रमुख जिम्मेदार नेता के एक करीबी संकुल समन्वयक भी का नाम सामने आया था, मामले के लिए जांच कमेटी भी बनी, कमेटी की रिपोर्ट का आज पता नही चल पाया और नही विभागीय तौर सार्वजनिक की गई।यहां काबिले गौर पहलू यह है कि फर्द के नाम से स्कूलों से अतिरिक्त राशि वसूली के बावजूद प्रभारी प्रधानपाठक द्वारा पीपरछेड़ी स्कूल में पॉंचवीं परीक्षा का फर्द अनुपलब्ध बताया जा रहा है । बहरहाल क्षेत्रीय विधायक के गृहग्राम से जुड़े मुद्दे पर जांच रिपोर्ट और कार्रवाई को लेकर लोगों में खासी उत्सुकता बनी हुई है?
शिक्षा विभाग में आरटीआई आवेदनों पर बाउंसर बालिंग, एक्टीविस्ट पस्त...**आरटीई की स्थिति भी कुछ ठीक नही**...
विद्वान अपीलीय अधिकारी का पारित आदेश चर्चा में
दोनों ही अधिनियम के माध्यम से आम नागरिकों को मिले कानूनी अधिकारों से खिलवाड़ शिक्षा विभाग के साथ संलग्न कार्यालयों के लिए आम बात है,आरटीआई आवेदनों को कैसे और किस हुनर के तहत् निष्प्रभावी बनाया जाए, अपीलीय मामलों पर आए -बाए आदेश पारित कर अपीलार्थी को गमराह कर दर-दर भटकाने की सोलह कला की शिक्षा भला कोई शिक्षा विभाग से सीखे ? मामले पर कलेक्ट्रेट भवन में प्रति मंगलवार समय सीमा की बैठक में उपस्थिति देने वाले परिसर में स्थित जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से लेकर बीईओ, बीआरसीसी तक के कार्यालयों में स्थितियां कमोबेश एक सी @हम किसी से कम नही@ की है, खास कर आर्थिक मामलो के आवेदनों पर।कलेक्ट्रेट, जेडी(शिक्षा) जैसे कार्यालयों के एफएओ द्वारा पारित आदेशों की नाफरमानी डीईओ कार्या.के लिए आम बात हो गई है, बताया जाता है कि यहां मास्टरी छोड़ प्रतिनियुक्ति की आड़ में आरटीआई सेक्शन की कमान सम्हाले कर्मचारी की कारगुजारियों की लंबी फेहरिस्तों की शिकायत ससाक्ष्य एसआईसी में किए जाने के संकेत है ,तो वही कार्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी फिंगेश्वर के एफएओ द्वारा पारित आदेश पर भी चर्चा और चिंतन का दौर शुरू हो गया है जिसमें विद्वान अधिकारी ने प्रधानपाठक के उस दलील को जिसमे बताया कि शाला में कोई पालक पंजी /सूची संधारित नही की गई है को स्वीकार कर पारित आदेश पर असंतुष्टि की स्थिति में अपीलार्थी को द्वितीय अपील कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी में करने की नसीहत दे दी। जबकि मामले पर वस्तु स्तिथि यह हैं कि प्रदेश की शालाओं में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद से ही पालक सूची /पंजी धाराओं का अनिवार्य हिस्सा हो गया है, इसी के आधार पर शाला प्रबंधन समिति का गठन और पालक शिक्षक बैठक जैसे अहम गतिविधियां शालाओं में संपन्न होती है, संबंधित शाला में भी यह सूची संधारित है जिसकी जानकारी प्रधानपाठक द्वारा अन्य विषय से सम्बन्धित धारा 6(1) के आवेदन पर पूर्व में दी गई हैं। पारित आदेश कथन द्वितीय अपील के संबंध अधिनियम सम्मत नियम यह कि एफएओ बीईओ के पारित आदेश के विरुद्ध धारा 19(3) के अन्तर्गत सुनवाई का अधिकार एसआईसी का होता है न कि कार्यालय -डीईओ का।

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