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हर्बल चाय के बाद अब मिलेगा हर्बल काफी का स्वाद : छिंद के बीजों से कैफ़ीन मुक्त काफी बनाने की तैयारी...

Deekay Thakur

Sat, May 9, 2026

बस्तर(छत्तीसगढ़)/देवेन्द्र साहू। छत्तीसगढ़ में अब छिंद के बीजों से कैफीन मुक्त हर्बल कॉफी तैयार करने की नई पहल शुरू की गई है। यह स्वास्थ्यवर्धक पेय न केवल लोगों को कॉफी का नया विकल्प देगा, बल्कि वन उत्पादों से जुड़े ग्रामीणों और महिलाओं के लिए रोजगार और आय बढ़ाने का माध्यम भी बनेगा। बस्तर के नैसर्गिक सौंदर्य और समृद्ध संसाधनों के बीच अब एक नई और सुगंधित क्रांति आकार ले रही है, जिसका श्रेय दंतेवाड़ा जिले के बचेली निवासी युवा उद्यमी विशाल हालदार को जाता है। बीकॉम और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की शिक्षा प्राप्त करने वाले विशाल ने अपनी जड़ों से जुड़े रहने और कुछ नया करने की चाह में छिंद (खजूर की एक स्थानीय प्रजाति) के उन बीजों से हर्बल कॉफी तैयार की है, जिन्हें अब तक बस्तर में पूरी तरह व्यर्थ समझा जाता था। इस अभिनव प्रयोग के पीछे विशाल का उद्देश्य न केवल बेकार पड़े प्राकृतिक संसाधनों का सदुपयोग करना है, बल्कि कॉफी के उन शौकीनों को एक स्वस्थ विकल्प प्रदान करना है जो स्वाद तो चाहते हैं लेकिन कैफीन के दुष्प्रभावों से बचना चाहते हैं। विशाल का यह सफर करीब दो वर्षों के गहन शोध और प्रयोगों का परिणाम है, जिसमें उन्होंने इंटरनेट की मदद और स्थानीय समझ का बखूबी तालमेल बिठाया है। विशाल की इस नवाचार को इनोवेशन महाकुंभ में प्रथम स्थान मिला, जिसके लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के द्वारा सम्मानित किया गया।

इस हर्बल कॉफी (herbal coffee) की सबसे प्रभावशाली विशेषता इसका पूरी तरह से कैफीन मुक्त होना है, जबकि इसमें छिंद के प्राकृतिक गुणों के कारण प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। विशाल का मानना है कि अधिकांश लोग केवल मानसिक सक्रियता के लिए ही नहीं, बल्कि कॉफी के अनूठे स्वाद और उसकी आदत के कारण इसका सेवन करते हैं, और उनकी यह खोज इसी वर्ग को ध्यान में रखकर की गई है। इस नवाचार को तब बड़ी पहचान मिली जब विशाल ने शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय जगदलपुर में आयोजित इनोवेशन महाकुंभ में अपना स्टॉल लगाया।

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